Gajraj aur Mushkraj, Hathi aur Chuhe ki kahani
हाथी और चूहे की कहानी 

हाथी और चूहे की कहानी | Gajraj aur Mushakraj -

बहुत पुरानी बात है एक बहुत बड़ी नदी के किनारे खंडहर हो चुके शहर में चूहों का कुनवा रहता था | उस कुनवे का राजा मूषकराज नामक चूहा था | मूषकराज सभी चूहों का बहुत ख्याल रखता था | चूहे इस स्थान पर बड़े मजे से रह रहे थे और खंडहर शहर के घरों में जो भी मिलता उसे खा कर अपना समय गुजार रहे थे | एक बार चारो तरफ बहुत अकाल पड़ा | पर आस-पास के क्षेत्र में पानी के सभी स्त्रोत सूख गए और |

पास के जंगल में हाथियों का झुण्ड रहता था | हाथियों का राजा गजराज नामक एक विशाल हाथी था | गजराज बहुत दयालु और हिम्मत वाला था | अकाल के कारण जंगल में भी जानवरों को पीने के लिए पानी नहीं मिला रहा था |  गजराज ने सभी हाथियों की सभा बुलाई और समस्या के निराकरण के उपाय पूछे | सभा में एक बृद्ध हाथी ने बतलाया – “ पास ही खंडहर हो चुके शहर के पास से एक विशाल नदी बहती है उसका पानी कभी नहीं सूखता | अगर नदी का पानी कम हो भी जाता है तो भी उसके बड़े पड़े पोखरों में साल भर पर्याप्त पानी रहता है | उस नदी से हम और हमरा झुण्ड अपनी प्यास बुझा सकता हैं |”

गजराज को उस बृद्ध हाथी का सुझाव अच्छा लगा |  गजराज ने सभी हाथियों को खंडहर हो चुके शहर के पास वाली नदी चलने के आदेश दिए | सभी हाथी उस दिशा में चल दिए और लम्बा सफर तय करने के बाद सभी खंडहर हो चुके शहर पहुंचे | हाथियों के रास्ते में आ जाने के कारण कई चूहे हाथियों के पैरों के नीचे आ और उनकी मौत हो गई | इस घटना से चूहे बहुत डर गए |

हाथियों का झुण्ड नदी किनारे पहुंचा और जी भर कर पानी पिया और स्नान किया | नदी के आस-पास सिर्फ रेत और पानी था दोपहर में धूप बहुत तेज रहती थी | हाथी धूप से बचने के लिए शहर के खण्डहर चले जाते और दोपहर की गर्मी में वहीँ रुकते थे | हाथियों के आने से कई चूहे प्रतिदिन हाथियों के पैरोंके नीचे कुचलने से कर मर रहे थे |

Hathi aur Guha ki kahani , Gajraj aur Musakraj
हाथी और चूहे की कहानी 

मूषकराज इस घटना से बहुत परेशान था और किसी भी तरह हाथियों को खंडहरों में आने से रोकना चाहता था | किसी ने मूषकराज को बतलाया आप हाथियों के राजा गजराज से मिलये वह बहुत दयालु है आपकी बात अवश्य सुनेगा | मूषकराज ने गजराज से मिलने का निश्चय किया परन्तु वह छोटा सा था और गजराज विशालकाय | मूषकराज एक पेड़ की ऊँची शाखा पर बैठ गया और गजराज के आने का इन्तजार करने लगा | जैसे ही गजराज उस पेड़ के पास से गुजरा  मूषकराज ने आवाज लगाई – “ गजराज ! हमारी समस्या का निराकरण करिये |”

 गजराज ने आस-पास देखा कोई दिखलाए नहीं दिया तभी उनकी नजर पेड़ की शाखा पर बैठे छोटे से मूषकराज पर पड़ी | मूषकराज ने कहा – “ गजराज ! मैं यहाँ के चूहों का राजा मूषकराज हूँ | आपके और आपके साथियों के पैरों के नीचे आ जाने से हमारे कई साथी अपनी जान गवां चुके है अगर आप लोग यहाँ रहे तो हमारा अस्तित्व ही ख़त्म हो जायेगा | कृपया हमारी सहायता करें |”

मूषकराज की बात सुनकर गजराज ने कहा – “ मूषकराज ! मेरे और मेरे साथियों से यह सब अनजाने में हुआ | हमारा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था | मुझे इस बात का बुत दुःख है | आप हमें क्षमा करें हम किसी और स्थान पर चले जायेंगे |”  

गजराज की बात सुनकर मूषकराज बहुत खुश हुआ और बोला – “ जब भी आपको हमारी किसी भी सहायता की आवश्यकता हो तो हमें अवश्य याद करिए |”

हाथी और उनका झुण्ड नदी के पास ही दोसरे स्थान पर रहने लगा | सूखा ख़त्म होने पर गजराज और उनका झुण्ड वापस जंगल चला गया | एक बार जंगल में कुछ शिकारी आये और उन्होंने जंगल में जाल फैला दिया | एक दिन गजराज उस जाल में फंस गयाऔर बहुत प्रयत्न करने पर भी जाल नहीं तोड़ सका | गजराज की यह हालत दूसरे जानवरों से नहीं देखी जा रही थी | तभी गजराज को अपने मित्र मूषकराज की याद आई और उन्होंने अपने एक मित्र को खण्डहर वाले शहर भेजा और मूषकराज को लाने के लिए कहा |

गजराज का मित्र तेजी से शहर की तरफ गया और मूषकराज से सारी बात बतलाई | मूषकराज बहुत छोटा था अगर जंगल जाता तो कई दिन लग जाते | मूषकराज गजराज के मित्र की पीठ पर बैठ गया और दोनों तेजी से जंगल की तरफ चल दिये | जंगल पहुँच कर मूषकराज ने अपने मित्र गजराज के जाल को काट दिया और मूषकराज की सहायता से गजराज जाल से मुक्त हो गए | गजराज ने जाल से मुक्त होते ही अपने मित्र मूषकराज को धन्यवाद दिया |

Gajraj aur Mushakraj ki kahani , Hathi aur Chuhe ki kahani
GajrajAur Mushakraj 


शिक्षा – “ गजराज और मूषकराज कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि मित्र चाहे छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब हमेशा कठिन वक्त पर काम आता हैं |”