jigyasu bandar ki kahani
जिज्ञासु बन्दर की कहानी 


जिज्ञासु बंदर की कहानी  | Jigyasu Bandar ki Kahani -


एक घने जंगल में सोनू  नाम का एक जिज्ञासु और साहसी बंदर रहता था। उसे  नई जगहें तलाशना और नई चीजें करना बहुत पसंद था।

एक दिन, घर से बहुत दूर घूमते समय सोनू ने एक पेड़ पर लटकता हुआ एक चमकदार, चमचमाता फल देखा। उसने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था। जिज्ञासा उस पर हावी हो गई और वह फल तोड़कर खाने से खुद को रोक नहीं सका।

सोनू ने फल तोड़ लिया और बगैर सोचे -समझे उसे खा लिया | फल खाते ही उसे अहसास  हुआ कि फल अविश्वसनीय रूप से कड़वा था और उसे तुरंत अपने फैसले पर पछतावा हुआ । उसे नहीं पता था कि यह एक दुर्लभ और जहरीला फल है। जल्द ही सोनू को कमजोरी महसूस हुई और वह बीमार पड़ गया।

सौभाग्य से कुछ बूढ़े बंदरों ने उसे देख लिया और उसे वापस अपने घर ले गए। बुद्धिमान बुजुर्ग बंदरों ने फल के जहर को पहचान लिया और समय रहते जहर मारक औषधि दे दी।

सोनू  को एहसास हुआ कि उसकी जिज्ञासा कभी-कभी खतरे का कारण बन सकती है। तब से वह और अधिक सतर्क हो गया और कुछ भी नया करने से पहले बूढ़े बंदरों से सलाह लेने लगा।

शिक्षा - 
 जिज्ञासु बन्दर की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि जिज्ञासा अच्छी है, लेकिन संभावित खतरों से बचने के लिए अपरिचित चीजों को आजमाने से पहले सतर्क रहना और मार्गदर्शन लेना जरूरी है।