Monday, 10 February 2020

घमंडी राजा और संत की हिंदी कहानी | Arrogant king and saint hindi Story




घमंडी राजा और संत की हिंदी  कहानी  | Arrogant king and saint hindi Story



किसी समय की बात है एक राजा को यह घमण्ड  था की उसके राज्य में जितने भी प्राणी हैं उन सभी का भरण पोषण राजा ही करता है | राजा का मानना था कि लोग तो भवगान विष्णु को जगत का पालन कर्ता यूँ ही कहते हैं , भगवान् को किसी ने नहीं देखा है | मैं ही अपनी प्रजा का पालनकर्ता हूँ | कुछ समय पश्चात एक योगी राजा के नगर में आये और नगर के एक घने वृक्ष के नीचे बैठ गए | योगी बहुत पहुंचे हुए संत थे धीरे-धीरे लोग योगी के बारे में जानने लगे और दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने के लिये आने लगे | अब योगी के पास उनके भक्तों की भीड़ लगी रहती थी | एक दिन योगी की प्रसिद्धी उस राजा के दरबार में भी पहुँच गई | जब राजा ने योगी के बारे में सुना तो उसके मन में भी योगी से मिलने की चाह हुई और वह भी योगी से मिलने पहुँच गया | जब राजा योगी के पास पहुंचा तो उसने देखा योगी के पास खाने का कोई पात्र नहीं है |
राजा ने योगी से पूछा- ‘’ आपके पास तो कोई पात्र ही नहीं है तब आपकी भोजन की व्यवस्था कैसे होती है, आपको भोजन किधर से मिलता है |’’
योगी ने उत्तर दिया –‘’ देने वाला तो ईश्वर है , वह सारी व्यवस्था बना देता है और हम इसी तरफ फक्कड़ जीवन जीते हैं |’’
राजा बोला- ‘’ मै सभी प्राणियों का अन्नदाता हूँ और आज से आपके भोजन की व्यवस्था भी कर देता हूँ |’’
राजा की घमण्ड भरी बातें सुनकर योगी ने पूछा-‘’ तुम्हारे राज्य में कितने मनुष्य और जानवर हैं |’’
राजा को इसकी जानकारी नहीं थी तो उसने अनभिज्ञता जाहिर की | तब योगी बोले –‘’ जब तुहें उनकी संख्या तक ज्ञात नहीं है तो तुम उनके भोजन की व्यवस्था कैसे कर सकते हो इसका अर्थ यही है की उन सबकी व्यवस्था भी भगवान ही करता है |’’
राजा योगी की बात से संतुष्ट नहीं हुआ और योगी से कहने लगा-‘’ आज मैं एक डिब्बी में एक कीड़े को बंद कर करके रखता हूँ और फिर में देखता हूँ ईश्वर इसे भोजन कैसे भेजता है |’’
राजा ने एक डिबिया ली और उसमें कीड़े को रख दिया और उसके पास सैनिकों का पहरा बैठा दिया |
दूसरे दिन जब राजा आया तो उसने देखा की कीड़ा चावल का दाना खा रहा है | जो डिबिया को बंद करते समय राजा के माथे पर लगे तिलक से उस डिबिया में गिर गया था |
तब योगी बोला – ‘’ देखा राजन , आपके ना चाहने पर भी भगवान ने इस कीड़े को भोजन दिया वह भी आपके माध्यम से | ठीक इसी प्रकार अन्य जीवों को  देने वाला भगवान ही है और वह माध्यम आपको बनाता है |’’
यह सुनकर राजा भी योगी के को नमन् कर सत्य स्वीकार कर लेता है |

शिक्षा- लोगों को अपने द्वारा किये गए कार्यों का घमण्ड नहीं करना चाहिये क्यूंकि कार्य तो ईश्वर की मर्जी से होते हैं मनुष्य तो एक साधन है |

Friday, 7 February 2020

शेर और गीदड़ की बोलने वाली गुफा | Sher aur Gidad ki bolne wali gufa

 

शेर और  गीदड़ की बोलने वाली गुफा | Lion and jackal-speaking cave hindi

एक विशाल जंगल था उस जंगल  में खरनख नामक शेर रहता था | वह शेर जंगल के जानवरों को मारकर  अपनी भूख मिटाता था | एक बार  उसने  शिकार करने का बहुत प्रयत्न  किया किन्तु उसके हाँथ कोई भी शिकार नहीं आया | अब वह भूख से परेशान हो गया था | धीरे-धीरे सूरज डूबने लगा शेर जिस जगह शिकार करने का प्रयत्न कर रहा था  वहीँ पास में एक गुफा भी थी |खरनख शेर उस गुफा में चला गया और सोचने लगा इस गुफा में कोई ना कोई जानवर अवश्य रहता होगा और वह शाम को अपनी गुफा में जरुर आयेगा और जैसे ही वह गुफा में प्रवेश करेगा में उसका शिकार कर लूँगा और मेरी भूख मिटा लूँगा | जब तक वह जानवर इस गुफा में नहीं आ जाता तब तक मैं यहीं आराम करता हूँ |
वह गुफा एक गीदड़ की थी उस गीदड़ का नाम दधिपुच्छ था | शाम होने पर पर गीदड़  अपनी गुफा के पास आ गया और  जैसे ही वह गुफा में घुसने वाला था उसने देखा  गुफा के पास शेर के पंजों  के निशान हैं |शेर के पंजो के निशान गुफा के अन्दर जाने के तो हैं परन्तु गुफा से बाहर निकलने के निशान नहीं हैं |दधिपुच्छ नामक  गीदड़ समझ गया कि उसकी गुफा  में कोई शेर गया तो है परन्तु वह वापस आया या नहीं इसका पता कैसे चलेगा |
गीदड़ ने उपाय सोच लिया | वह गुफा के पास गया और जोर से बोलने लगा -' '  मेरी बोलने बाली गुफा ,आज तू शांत क्यूँ है ,तूने मुझसे कहा था की अगर मैं लोट आया तो तू  मुझसे बात करेगी , तू  मुझसे बात क्यूँ  नहीं कर रही है ?''
गीदड़ को बोले हुए कुछ समय हो गया परन्तु गुफा ने कोई जवाब नहीं दिया | गीदड़ ने गुफा  के सामने  गुफा को संबोधित करते हुए  दुबारा फिर से वहीँ बातें कहीं जो थोड़ी देर पहले की थीं | गीदड़ की बातें सुनकर शेर को लगा की शायद यह गुफा खुद बोलती हो जब भी गीदड़ आता हो तो यह इससे बात करती होगी परन्तु आज मेरे डर से यह बोल नहीं रही है | अगर  यह गुफा नहीं बोली तो गीदड़ को शक हो जायेगा और वह इधर से चला जायेगा और मैं भूखा रहा जाऊंगा | इसलिए मैं ही बोल देता हूँ और यह सोच कर शेर स्वयं बोलने लगा-'' आओ गीदड़ मैं  कब से तुम्हारा इन्तजार कर रही थी , अन्दर आ जाओ |"   
जैसे ही अन्दर से आवाज आई गीदड़ समझ गया कि अन्दर कोई बेवकूफ शेर है जो गीदड़ के गुफा में जाने का इन्तजार कर रहा है और अन्दर जाते ही उसका शिकार कर लेगा | गुफा के अन्दर से आती आवाज सुनक गीदड़ वहां से भाग गया और शेर की गर्जना सुनकर गुफा के आस-पास के जानवर भी वहां से चले गए | खरनख नामक  शेर यह जानता था की गुफा नहीं बोल सकती फिर भी  शेर ने अपनी  मूर्खता से उस गीदड़ को भगा दिया जिसे वह खाना चाहता था |

शिक्षा- अपनी बुद्धिमानी से आने वाले संकट से बचा जा सकता है |

Thursday, 6 February 2020

कबूतर और शिकारी की कहानी हिंदी | Kabutar aur Shikari ki Kahani Hindi

 
kabuter aur shikari ki kahani | panchtantra kahani hindi | ekta men bal hota hai

कबूतर और शिकारी | पंचतन्त्र की कहानी हिंदी |Kabutar aur Shikari Panchtantra ki Kahani Hindi -

बहुत पुरानी बात है कबूतरों का एक झुण्ड था | वह जिस स्थान पर रहता था एक बार वहां भयानक अकाल पड़ा | आस-पास खाने के लिये कुछ नहीं बचा |झुण्ड के सभी कबूतर भूखे थे |  कबूतरों के मुखिया का नाम चित्रगुप्त था | कबूतरों के झुण्ड को चित्रगुप्त ने अनाज की  तलास में दूसरी जगह  उड़ान भरने का आदेश दिया | चित्रगुप्त ने एक जवान कबूतर को यह जिम्मेदारी दी की वह देखते चले कि जमीन पर अनाज किस जगह मिलेगा | वह जवान कबूतर सबसे नीचे उड़ान भर रहा था  भूख के कारण  सभी कबूतरों शक्ति क्षीण होने लगी थी | जवान कबूतर को एक जगह अनाज बिखरा हुआ दिखलाई दिया | उसने जानकारी चित्रगुप्त को दी | भूख से व्याकुल झुण्ड की परेशानी को देखते हुए चित्रगुप्त ने  झुण्ड को नीचे उतरने आ आदेश दिया |

कबूतर शिकारी के जाल में कैसे फंसे- 

सभी कबूतर नीचे उतारकर दाना चुगने लगे लेकिन वह दाने एक शिकारी (बहेलिया) ने फेंक रखे थे और एक वृक्ष पर जाल तान रखा था | जैसे ही कबूतरों के झुण्ड ने दाना चुगना शुरू ही किया था कि  शिकारी ने जाल नीचे गिरा दिया अब कबूतरों का पूरा झुण्ड उस जाल में फंस गया |
कबूतरों का सरदार चित्रगुप्त पछताते हुए कहता है -''ओह, यहाँ तो शिकारी ने जाल फेंका था और हम भूख से इतने व्याकुल थे कि दाना  चुगने के पहले हमने कुछ सोचा ही नहीं |''
उनमें से कुछ कबूतर बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे और कुछ रोने लगे किसी ने कहा -''शिकारी अब हम सभी को मार देगा |''
लेकिन उनका सरदार चित्रगुप्त गहरी सोच में था और कहने लगा-''जाल बहुत मजबूत है , हम में से कोई भी जाल को नहीं तोड़ सकता परन्तु एकता में बहुत बल होता है ,  यदि हम सब मिल जायें तो मोत  को भी मात दे सकते  हैं |''
उनमे से एक कबूतर बोला-'' सरदार स्पष्ट बतलाओ क्या बोलना चाहते हो ?''
सरदार चित्रगुप्त बोला-'' तुम सब मिलकर अपनी-अपनी चोंच से जाल को पकड़ना और जब मैं उड़ उड़ने के लिये फुर्र  बोलूं तो सब एक सांथ उड़ जाना |''

कबूतर जाल से कैसे मुक्त हुए - 

सभी कबूतरों ने सरदार की बात मान ली और आगे की योजना बनाई  | शिकारी कबूतरों के तरफ ही आ रहा था | उसके जाल तक आने से पहले ही चित्रगुप्त ने फुर्र बोला और सारेकबूतरों ने एक सांथ दम  लगाकर उड़ान भरी तो पूरा जाल ऊपर उठ गया और कबूतर जाल को लेकर उड़ गए |यह दृश्य देखकर शिकारी भी अचंभित हो गया वह कुछ समझ पाता उसके पहले ही कबूतर उसकी पकड़ से दूर जा चुके थे | कबूतरों को उड़ता देख शिकारी भी जाल के पीछे-पीछे दौड़ने लगा |उसे उमींद थी कि कबूतर जाल को लेकर ज्यादा दूर तक नहीं उड़ पायेंगें |
कबूतरों के सरदार चित्रगुप्त ने शिकारी को पीछे आते देखा तो वह थोडा भयभीत हुआ परन्तु उसने जाल से निकलने की योजना भी बना ली थी | पास की  एक पहाड़ी पर उसका  एक मित्र हिहिरण्यक नामक  चूहा रहता था| सरदार ने सभी को उसी दिशा में जाने का आदेश दिया जिधर उसका मित्र  चूहा रहता था | कुछ ही देर में सभी कबूतर चूहे के बिल के पास उतरे |
सरदार ने अपने मित्र चूहे को आवाज लगाई -''भाई हिरण्यक अपने बिल से बहार आओ ,आज मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता है | "
हिरण्यक चूहा अपने मित्र चित्रगुप्त की आवाज पहचान गया और जैसे ही बिल से बाहर आया चित्रगुप्त ने संक्षेप में सारा किस्सा सुना दिया और जल्द से जल्द जाल काटने के लिये कहा | मूषक हिरण्यक ने कुछ ही देर में जाल काट दिया और सारे कबूतर स्वतन्त्र  हो गए | कबूतरों के सरदार चित्रगुप्त ने अपने मित्र चूहे हिरण्यक को धनयवाद दिया और कबूतरों का झुण्ड फिर से आजादी के सांथ आसमान में उड़ने लगा |

शिक्षा- संगठन में बल होता है |संगठित होकर असम्भव को भी संभव कर सकते हैं |

Tuesday, 4 February 2020

Best moral story in hindi 2020 | नैतिक शिक्षाप्रद हिंदी कहानियां

Best moral story in hindi 2020 | नैतिक शिक्षाप्रद हिंदी  कहानियां

15 हिंदी की नैतिक शिक्षाप्रद कहानियां  | 15 Best moral story in hindi -

बच्चों को बचपन से जो बातें सिखलाई जाती है उनका असर लम्बे समय तक बच्चों के दिमाग में रहता है | इसीलिये हमारे ऋषि-मुनियों और लेखकों ने  समय-समय बच्चों के लिये  प्रेरणादायक कहानियों  (moral story in hindi) के रचना की  हैं ताकि इन कहानियों से  बच्चे  मनोरंजन के सांथ-सांथ कुछ ज्ञानवर्धक बातें सीख सकें | उनमें से कुछ चुनी गई कहानियां (moral story in hindi ) नीचे दी गई हैं-

(1)लोमड़ी और अंगूर खट्टे हैं |moral story in hindi -


इस कहानी में एक लोमड़ी थी | एक दिन घूमते घूमते वह एक अंगूर की बेल के पास पहुँची | अंगूर की बेल एक ऊँचे पेड़ से लिपटी थी | बेल से पके हुए अंगूर लटक रहे थे| अंगूर देख कर लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया | लोमड़ी बहुत भूखी थी और अंगूर ऊंचाई पर | लोमड़ी ने अंगूर खाने के लिये जोर से छलांग लगाई परन्तु वह अंगूर तक नहीं पहुँच सकी | लोमड़ी की भूख अब बढ़ते ही जा रही थी  और उसने दुबारा छलांग लगाई परन्तु वह फिर भी अंगूर तक नहीं पहुँच सकी |लोमड़ी ने बार-बार प्रयास किया परन्तु वह अंगूर तक नहीं पहुँच सकी | आखिरकार वह थक कर जाने लगी |
जाते जाते लोमड़ी अंगूर को देख कर कहती है --'' अंगूर तो खट्टे है , इन्हें खाने से क्या फायदा |''

शिक्षा- हार मानने में बुराई नहीं है |


(2) राजा और चमड़े की सड़क |moral story in hindi -


एक राजा थे | उनका राज्य बहुत बड़ा था | वे अपनी प्रजा का बहुत ख्याल रखते थे | एक दिन उन्होंने सोचा की आज अपने राज्य घूम कर प्रजा का हाल देखते हैं | एक दिन वो एक गरीब का वेश धर कर अपने राज्य का हाल चाल देखने निकले | उनका राज्य बहुत बड़ा था  और रास्ता बहुत ही उबड़ -खाबड़ और पथरीला था | राजा जब लोट कर आये तो उनके पैरों में छाले पड़ गए और पैर भी बहुत दुःख रहे थे |राजा सोचने लगे की मुझे एक दिन में इतनी तकलीफ हो रही है तो प्रजा को रोज कितनी  तकलीफ होती होगी | राजा ने आदेश दिया कि  राज्य की सभी सड़कों पर चमड़े की कालीन  विछ्वा दी जाये |
जब बात मंत्री को पता चली तो उसने हिसाब लगाया की चमड़े की कालीन बनवाने में लाखो जानवरों को मारना पड़ेगा ,जानवरों के मरने से  लोगों को दूध भी नहीं मिलेगा , खेती के लिये जानवर भी नहीं बचेंगे , महामारी भी फैलेगी और शासकीय खजाना खाली हो जायेगा |
 मंत्री ने हिम्मत कर राजा से कहा -'' महाराज  इस तरह तो हमारा खजाना ही  खाली हो जायेगा और लाखो जानवर भी मारे जायेंगे , अच्छा होगा की हम सड़कों पर चमड़े की कालीन बिछाने के बदले अपने पैरों के लिये उसी चमड़े की जूती बनवा लें ''|
राजा को मंत्री का सुझाव बहुत पसंद आया और उसने अपनी गरीब प्रजा के लिये चमड़े के जूते  सिलवा दिए |

शिक्षा-  इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है कि पूरी दुनिया को सुधरने से अच्छा है हम अपने स्वयं को सुधार लें |


(3) चालाक लोमड़ी और  कौआ की कहानी  |moral story in hindi


एक राज्य में एक कौआ  रहता था | एक दिन  वह किसी के घर से रोटी चुराकर ले आया और एक पेड़ पर बैठ कर खाने लगा | दूर से एक लोमड़ी यह सब देख रही थी , वह भी भूखी थी रोटी देखकर उसका मन भी ललचा गया | वह कौआ  से रोटी लेने की तरकीब सोचने लगी | लोमड़ी भी उसी पेड़ के नीचे पहुँच गई जिस पर कौआ  बैठा था | लोमड़ी ने कौआ से नमस्कार किया परन्तु उसने कोई उत्तर नहीं दिया | फिर लोमड़ी बोली -''कौआ राजा आज तो आप बहुत ही सुन्दर और चमकदार लग रहे हो , मैंने सुना है की आपकी आवाज भी बहुत सुरीली है ,आपमें तो इन सभी कौओं का राजा बनने की क़ाबलियत है , मैं तो  आपकी मधुर  आवाज सुनना चाहती हूँ |''
लोमड़ी की चिकनी-चुपड़ी बातें सुनकर कौआ सोचने लगा सचमुच मैं कौओं का राजा बन सकता हूँ , यह बात मैं लोमड़ी को सिद्ध कर देता हूँ | कौआ  ने गाने के लिये जैसे ही अपनी चोंच खोली रोटी जमीं पर गिर गई | लोमड़ी तो यही चाहती थी उसने झट से रोटी उठाई और उधर से भाग गई |

शिक्षा- चिकनी -चुपड़ी बातें करने वालों से हमेशा सावधान रहना चाहिये |


(4) मोर  और कौआ की कहानी |moral story in hindi


एक जंगल में एक कौआ रहता था वह जब भी जंगल के मोरों को देखता तो मोरों की खूबसूरती को देख मन ही मन जलता और सोचता भगवान् ने उसे इतना सुन्दर शरीर क्यूँ नहीं दिया | एक दिन उसने देखा की जंगल में बहुत से मोर नृत्य कर रहे हैं | नृत्य करने के बाद मोरों के बहुत से पंख जंगल में बिखर गए | कौए ने मोरों के पंख एकत्र किये और अपने शरीर पर चिपका  लिये | उसने सोचा अब वह मोरों से भी ज्यादा सुन्दर दिखने लगा और यही दिखलाने के लिये मोरों के पास पहुँच गया | उसे  देख मोर जोरों से हँसने लगे | कुछ मोरों को लगा यह धोखे से मोरों में शामिल होना चाहता है | मोरों ने मिलकर कौए की  पिटाई कर दी | कौआ उधर से भाग कर  मोरों को सबक सिखलाने के लिये अन्य कौओं के पास पहुंचा और सारा किस्सा  बतलाया |  कौओं की सभा लगी एक बुजुर्ग कौआ बोला -'' यह हमारा अपमान करता है और मोर बनना चाहता है | जो प्राणी अपनी जाती से संतुष्ट नहीं रहता वह , कहीं भी संतुष्ट  नहीं हो सकता | यह मोरों से पिटकर  हमारे पास आया है |हमें भी इससे अपनी बेज्जती का बदला लेना चाहिये |''
इतना  सुनकर सारे कौओं ने मिलकर उसकी की पिटाई कर दी |

शिक्षा-  ईश्वर ने हमें जैसा रूप दिया उसी में खुश रहना चाहिये और प्राणी अपने रूप से नहीं वल्कि कर्मों से महान  बनता है |


(5) मधुमक्खी और कबूतर की कहानी |moral story in hindi


एक जंगल में एक मधुमक्खी  रहती थी वह फूलों का रस एकत्र करने के लिये पुरे जंगल में घूमती  रहती थी एक दिन वह एक नदी के किनारे फूल पर बैठी थी तभी हवा का एक जोरदार झोंका आया और वह नदी के पानी में गिर गई | पानी में गिरने से उसके पंख गीले हो गए औरपंख गीले हो जाने से वह उड़ भी नहीं पा रही थी | उसे लगा अब वह नहीं बच पायेगी वह जोर से बचाव-बचाव चिल्लाने लगी | उसकी आवाज पास ही में बैठे कबूतर तक पहुंची | कबूतर ने पेड़ का एक पत्ता तोडा और अपनी चोंच से मधुमक्खी  के पास रख दिया |मधुमक्खी  उस पत्ते पर बैठ गई और उस नदी के किनारे लग गई |पंख सूखने पर वह फिर से उड़ने लगी |
एक दिन वही कबूतर अपने पेड़ पर सो रहा था | तभी एक शिकारी आया और अपनी बन्दुक से कबूतर पर निशाना साधा | मधुमक्खी  ने शिकारी को कबूतर पर निशाना साधते हुए देख लिया | मधुमक्खी  झट से शिकारी के पास पहुंची और शिकारी के हाँथ पर डंक मार दिया | शिकारी दर्द के कारण चिल्लाने लगा | शिकारी के चिल्लाने की आवाज से कबूतर के नींद  खुल गई | कबूतर पूरा माजरा समझ गया और उसने अपनी जान बचाने के लिये मधुमक्खी  को धन्यवाद दिया |

शिक्षा- अच्छाई का फल अच्छा ही होता है |


(6) टिड्डा और चींटी की कहानी  | moral story in hindi


बसंत ऋतू का मौसम था | बसंत ऋतू में खाने के लिये अनाज की कोई कमी नहीं थी इस मौसम में एक टिड्डा  पेट भर खाना खाकर आराम कर रहा था  और गीत गाकर सुकून से रह रहा था | उसने देखा की कुछ चींटियां खाने की  सामग्री एकत्र कर रही हैं  और उसे अपने घरों में ले जा रहीं हैं | उसमें से एक चींटी टिड्डे की दोस्त थी | टिड्डे ने चींटी से कहा -''तुम सब कितनी लालची हो |आसपास अनाज का भण्डार है और तुम अनाज एकत्र कर रही हो |''
 चींटी ने जबाब दिया -''हम यह अनाज आने वाली गर्मी और बरसात के लिये एकत्र कर रहे हैं , और तुम्हे भी भविष्य के लिये कुछ अनाज संग्रहित करना चाहिये |''
टिड्डा  अपनी ही मस्ती में मस्त था और उधर से चींटीओं की हंसी उड़ाते हुए  अपना गाने गाते हुए मस्त चाल से उधर से चला गया |
धीरे-धीरे गर्मी का मौसम आया अनाज कम होने लगा और एक समय ऐसा आया की टिड्डा  के लिये खाने तो कुछ भी नहीं बचा | टिड्डा  अब परेशान हो गया | उसे अपनी दोस्त चींटी की याद आई |वह चींटी के घर पहुंचा और जाकर बोला -'' मैं बहुत भूखा हूँ , मुझे कुछ खाने को दे दो |''
चींटी बोली -''बसंत ऋतू में जब अनाज था तब तो तुम मस्त  गीत गाकर घूम रहे थे और हमारी हंसी उड़ा रहे थे , तुम जैसे आलसी के सांथ ऐसा ही होना चाहिये | जाओ मैं तुम्हे कुछ नहीं डे सकती |''

शिक्षा- बचत और मेहनत ही भविष्य में काम आती है |


(7) आलसी व्यक्ति और उसकी ईश्वर भक्ति | moral story in hindi -


एक व्यक्ति था वह ईश्वर का परम भक्त था परन्तु वह आलसी भी था | एक दिन वह बैलगाड़ी में बैठ कर दुसरे  गाँव जा रहा था , रास्ते में उसे एक नाला मिला | नाले में उसकी बैलगाड़ी धंस गई |  व्यक्ति बैलगाड़ी  उतारा और पेड़ के नीचे बैठकर भगवान को याद करने लगा | वह व्यक्ति सच्चे में से भगवान को याद कर रहा था | आखिरकार उसकी भक्ति के कारण भगवान उसके सामने प्रकट हो गए | भगवान उस व्यक्ति से बोले -' तुमने मुझे क्यूँ याद किया है ? वह इंसान भगवान् से बोला-''भगवान मेरी गाड़ी नाले में फंस गई है , इसे निकाल दीजिए |'' भगवान  को भी उस पर हंसी आई | भगवान ने कहा --'' हे भले मानस , इस प्रकारमैं मनुष्य का हर छोटा-मोटा काम करने लगा  तो मनुष्य कुछ नहीं करेगा , ईश्वर  तो मनुष्य को केवल शक्ति  प्रदान करता है , काम तो मनुष्य को ही करना पड़ेगा  |वह व्यक्ति  ईश्वर  से कहने लगा कि उसमें इतना शक्ति  नहीं है की वह नाले से बैलगाड़ी निकाल सके |  ईश्वर  ने  उसे समझाया जा तू अपने बैलों को ललकार और अपनी पूरी शक्ति लगा दे मेरा आशीर्वाद और मेरी शक्ति  तेरे सांथ है | उस व्यक्ति ने भगवान की बात मानकर भगवान  को स्मरण कर  बैसा ही किया  और अपनी बैलगाड़ी को नाले से बाहर ले आया |

शिक्षा-  ईश्वर  इंसान को आत्मविश्वास और शक्ति  देता है परन्तु अपने काम  इंसान को स्वयं मेहनत और प्रयत्न  से ही करना पड़ता है |


(8) मिठाई की सुगंध और पैसे की पैसे की खनखनाहट| moral story in hindi -


एक मजदूर था अवह प्रतिदिन मजदूरी करने गाँव के बाहर जाता था | एक दिन वह मजदूरी क्र बाद घर लौट रहा था | रास्ते में उसे मिठाई की सुगंध आई |वह अनायास ही उस सुगंध की और मुड़  गया | उसने देखा सामने की तरफ एक हलवाई की मिठाई की दुकान है | वह उस दूकान के पास जाकर खड़ा हो गया | उसके पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं थे इसी कारण वह कुछ देर वहीँ खड़ा होकर  मिठाई की सुगंध का आनंद लेता रहा | जब वह उधर से जाने लगा तो हलवाई ने मजदूर को रोककर कहा-'' किधर जा रहे हो पैसे तो देते जाओ |''  हलवाई के बात सुनकर मजदूर हक्का बक्का रह गया और उसने पूछा -''किस बात के पैसे |''
हलवाई ने कहा -''तुम इतनी देर खड़े होकर मेरी मिठाईयों की खुशबु ले रहे थे उसी के पैसे , मिठाई की खुशबू लेना भी मिठाई खाने के समान ही है |''
हलवाई की बात सुनकर मजदूर सन्न रह गया | फिर वह कुछ सोचने लगा और अपने जेब में हाँथ डालकर सिक्के खनखनाने लगा | सिक्कों की आवाज सुनकर हलवाई भी खुश हो गया  सोचने लगा कि मजदूर उसे सिक्के देने वाला है | फिर थोड़ी देर बार मजदूर ने कहा -'' मिल गए तुम्हें अपने पैसे |''
हलवाई ने कहा -'' मुझसे मजाक मत करो और चुपचाप मेरे पैसे दे दो '' | मजदूर ने कहा -'' मैंने पैसे तो दे  दिए |'' मजदूर की बात सुनकर हलवाई गुस्से में कहने लगा --'' तुमने पैसे कब दिए हैं |''
मजदूर ने कहा  -'' जैसे मिठाई की सुगन्ध लेना मिठाई खाने के सामान है उसी तरह पैसे की खनखनाहट सुनना पैसा लेने के समान है |''

शिक्षा- जैसे को तैसा उत्तर देना चाहिये |


(9) नाकामी से भी सीख लेना |moral story in hindi -


थॉमस एडिसन बल्ब का फिलामेंट बनाने का प्रयत्न कर रहे थे | फिलामेंट के लिये उन्होंने दो  हजार बार बिभिन्न तत्वों और धातुओं का प्रयोग किया परन्तु उनका प्रयोग हर बार नाकामयाब रहा |नाकामी देख उनके  शिष्य ने कहा-'' हमारी पूरी मेहनत बेकार गई और हमें इससे कुछ नहीं मिला |''
शिष्य की बात सुनकर थॉमस एडिसन हँसते हुए बोले -'' हमने बहुत लम्बा रास्ता तय किया है और इस सफ़र में हमने यह सीखा है की इन दो हजार तत्वों और धातुओं का उपयोग करके बल्ब के लिये अच्छे फिलामेंट नहीं बना सकते | "
 थॉमस एडिसन ने आगे भी अपना प्रयोग जारी रखा और अंततः बल्ब का फिलामेंट बनाने  में सफलता पाई |

सिक्षा - हमें नाकामी से घबराना नहीं चाहिये और लगातार प्रयत्न करने से ही सफलता मिलती है |


(10) माँ की ममता और राजा का इन्साफ | moral story in hindi -


बहुत समय पहले की बात है एक बच्चे के लिए दो स्त्रियाँ झगडा कर रहीं थीं | वह दोनों ही कह रहीं थीं के बच्चे की असली माँ वही है| बच्चा बहुत हो छोटा था वह ना तो कुछ बोला पाता था ना ही बतला पाता था | लोगों ने महिलाओं को समझाने का  बहुत प्रयत्न किया परन्तु झगडा शांत नहीं हुआ | आखिरकार लोग उन दोनों औरतों को राजा के पास ले गए | राजा ने दोनों से पूछा बच्चा किसका है | दोनों औरतों ने अपना-अपना दावा पेश किया | राजा ने यहाँ तक कहा कि सच पतला दो अन्यथा  जो औरत झूंठ बोल रही है उसे दण्ड दिया जायेगा | फिर भी दोनों बच्चे को अपना बतलाती रहीं|कोई भी निर्णय ना  होते देख राजा को  उपाय सूझा |
 आखिर राजा ने अपने सैनिकों से  कहा -''  ये दोनों ही बच्चे की असली माँ हैं , दोनों का यही दावा है तो बच्चे को दो टुकड़े करके दोनों महिलाओं को दे दो |''
उनमें से एक स्त्री कुछ नहीं बोली और दूसरी स्त्री जोर-जोर से रोने लगी और बोली -'' महाराज दया करें ,मेरे बच्चे को ना मारें ,आप चाहें तो इस स्त्री को मेरा बच्चा दे दें , मैं इस बच्चे पर से अपना दावा छोड़ती हूँ |''
राजा तुरंत समझ गया की बच्चे की असली माँ कोन है ?  उसने बच्चा रोने वाली माँ को दे दिया और दूसरी स्त्री को जेल भिजवा दिया |

शिक्षा- '' माँ कभी भी अपने बच्चों का बुरा होते नहीं देख सकती और  अंत में जीत सच्चाई की होती है |


(11) राजा को  चींटी की सीख | moral story in hindi -


एक  राजा था उसका नाम रूद्रदमन था वह पहुत ही बहादुर और पराक्रमी था | एक बार पडोसी राज्य के राजा ने उस पर आक्रमण कर दिया और रूद्रदमन बहुत ही  शाहस और बहादुरी से लड़ा परन्तु उसकी सेना छोटी होने के कारण वह हार गया और मजबूरन उसे पास की पहाड़ियों में शरण लेनी पड़ी |पडोसी राजा ने उसका  राज्य छीन लिया | राजा ने अपने राज्य को वापस लेने का प्रयत्न किया परन्तु उसे सफलता नहीं मिली |
रूद्र दमन बहुत उदास होकर  जब पहाड़ी की गुफा में आराम कर रहा था  उसी समय उसकी नजर एक चींटी पर पड़ी वह अपना भोजन ले जाने के लिये  गुफा की दीवार  पर चड़ने का प्रयत्न कर रही थी रही थी परन्तु दीवार  सीधी और चिकनी होने के कारण उसे सफलना नहीं मिल पा रही थी | वह कई बार दीवार से गिरी परन्तु हर बार उठकर पुनः दीवार पर चढ़ने का प्रयत्न करती | | अंत में चींटी  उस दीवार के ऊपर चड़ने में कामयाब हो गई  |राजा यह सब बड़े ध्यान से देख रहा था | यह सब देख राजा सोचने लगा जब यह नन्ही सी चींटी बार-बार असफल होने के बाद भी प्रयत्न करती रही और इसे सफलता मिली | मैं तो एक राजा हूँ मुझे प्रयास करने में सफलता क्यूँ नहीं मिलेगी |अब राजा एक नए जोश के सांथ उठ खड़ा हुआ और उसने अपनी बिखरी सेना एकत्र की और कुछ दिन युद्ध का अभ्यास किया और युद्ध तैयारिया शुरू कर दी |
एक दिन फिर से दोनों राजाओं की सेनायें  आमने सामने थीं परन्तु इस बार रूद्रदमन पूरी तैयारी से युद्ध में शामिल हुआ और अपने शत्रू को परास्त  कर अपना राज-पाठ वापस लेने  में सफल रहा |

सिक्षा - असफलता  से ना डरकर बार-बार प्रयत्न करने  से ही सफलता मिलती है |


(12) घमंडी मोर और बुद्धिमान सारस | moral story in hindi -


एक मोर  था उसे अपने शरीर और अपनी सुन्दरता का बड़ा घमंड था | वह हमेशा अपने पंखों और अपने सोंदर्य का बखान करता रहता था | एक दिन वह एक तालाब  के किनारे पानी पी रहा था |उसी समय वहां पास में एक सारस भी टहल रहा था | उसने मोर को देख कर उसके हाल-चाल पूछे | मोर ने मुंह सिकोड़ते हुए जवाब दिया-''मै तो अच्छा हूँ , जिधर भी जाता हूँ मेरी सुन्दरता देख कर लोग मुझसे दोस्ती करना कहते हैं परन्तु तुम को रंगहीन हो और तुम्हारे पंख भी  सादे और रंगहीन है |''
सारस को मोर की बात बार हंसी आई वह हंसकर बोला-'' सच कह रहे हो मोर मित्र तुम तो बहुत ही खुबसूरत हो तुम्हारे पंख भी बहुत रंग बिरंगे हैं परन्तु जो काम मेरे पंख कर सकते हैं वह तुम्हारे पंख नहीं कर सकते , मैं तो अपने पंखो से आसमान मेंबहुत  दूर तक उड़ सकता हूँ परन्तु तुम नहीं उड़ सकते |''
इतना कहकर सारस अपने पंखों से आसमान में दूर तक उड़ गया और मोर देखता रह गया |

शिक्षा- सुन्दरता से अधिक गुण महत्वपूर्ण होते हैं |


(13) लालबहादुर शास्त्री और कपडे की सिलाई |moral story in hindi -


लाल बहादुर शास्त्री भारत के सबसे चहेते प्रधानमंत्रीयों  में से एक थे | वह एक गरीब परिवार से आये थे वे  अपना हर काम स्वयं ही करते थे |  अगर उनके कपडे फट जाते तो नया कपडा लेने के बजाय वह उसे सिल कर पहन लेते थे | जब वह भारत के प्रधान मंत्री थे तब एक दिन वह सुई धागा से अपना कुर्ता  सिल रहे थे उस समय उनके एक मित्र भी वहीँ थे | शास्त्री जी को कुर्ता सिलता देख अचंभित होकर शास्त्रीजी से कहने लगे- '' आप तो भारत के प्रधान मंत्री है और आप चाहें तो नया कुर्ता ले सकतें हैं परन्तु आप तो कुर्ते  को  स्वयं ही सिल रहें हैं | आप चाहें तो आपके कर्मचारी से भी यह काम करवा  सकते हैं |''
शास्त्रीजी ने मित्र को उत्तर दिया -'' मित्र मैं एक गरीब परिवार से आया हूँ और और एक गरीब देश का प्रधानमंत्री हूँ अगर में रोज नये कपडे पहनू तो यह पैसा मेरे देश की गरीब जनता के जेब से जायेगा  और मेरे जो कर्मचारी  हैं यह मेरे शासकीय कार्यों के लिये हैं ना की मेरा कुर्ता सिलने के लिये |''
भारत के एक प्रधानमंत्री के बात सुनकर उनके  मित्र भी निरुत्तर रह गए  और मन ही मन शात्री जी की महानता के कायल हो गए |

शिक्षा- ''व्यक्ति अपने पद से नहीं अपितु  अपने कर्मों से महान बनता है |''


(14)  जिद्दी बच्चा |moral story in hindi -


एक बच्चा था वह बहुत ही जिद्दी था |उसे बादाम और काजू बहु पसंद थे वह हमेशा अपनी माँ से काजू और बादाम मांगता था उसकी माँ  उसे थोड़े से काजू  और कुछ बादाम दे देती थी परन्तु वह और ज्यादा काजू-बादाम की मांग करता | उसकी माँ उसे हमेशा समझाती कि थोड़े से काजू-बादाम बच्चों के लिए अच्छे होते हैं परन्तु ज्यादा काजू बादाम से पेट में दर्द होने लगेगा | उस समय वह माँ की बात तो मान लेता परन्तु जबभी उसे मौका मिलता वह ढेर सारे  काजू बादाम खा लेता |
एक बार उसकी माँ बाहर गई थी | बच्चा घर में अकेला था उसने काजू-बादाम ढूंढे और पेट भर खा लिए अब बच्चे के पेट में जोरों का दर्द होने लगा | घर में कोई नहीं था बच्चा बहुत देर तक परेशान  होता रहा | जैसे ही उसकी माँ आई तो उसे डॉक्टर के पास ले गई | डॉक्टर ने भी बच्चे को समझाया की हमेशा अपने मन की नहीं करना चाहिये | बच्चों को हमेशा अपने माता-पिता की बात मानना चाहिये |

शिक्षा- माता-पिता बच्चों के भलाई के ही बात करते हैं और हमें हमेशा अपने माता-पिता की बात माननी  चाहिये |


(15)  शेर आया-शेर आया  | moral story in hindi -


एक बालक था वह बहुत  शैतान था | वह रोज भेड़ चराने जंगल जाता था | एक दिन उसके दिमाग में आया कि आज गाँव के लोगों को परेशान किया जाये |जब वह ऊँची पहाड़ी पर भेड़ चारा रहा था और  वहीँ से जोर जोर से चिलाने लगा शेरआया-शेर आया | गाँव वाले उसकी बात सुनकर अपने डंडे-लाठियां  लेकर उस पहाड़ी तक पहुँच गए |गाँव वालों को आया देख बच्चा जोर जोर से हँसने लगा | गाँव वाले समझ बच्चे ने गाँव वालों को परेसान करने के लिये यह सब किया है |
कुछ दिनों बाद बच्चे ने फिर वही काम किया | गाँव वाले इस बार भी पहाड़ी पर पहुँच गए परन्तु इस बार भी कोई शेर नहीं आया |
कुछ दिनों बाद जब बच्चा पहाड़ी पर भेड़ चारा रहा था तब सचमुच शेर आ गया और भेड़ों पर हमला कर दिया | बच्चा जोर-जोर चिल्लाने लगा शेरआया -शेर आया   | गाँव वालों ने बच्चे के चिल्लाने की आवाज सुनी परन्तु इस बार किसी ने उसके चिल्लाने पर ध्यान नहीं दिया | जब वह बहुत देर तक चिल्लाता रहा तब गाँव वाले पहाड़ी पर पहुचे और बच्चे और भेड़ों को बचाया परन्तु तब तक शेर कुछ भेड़ों का शिकार कर  चुका था | बच्चे को अपनी हरकत और गलती पर बहुत शर्मिंदगी हुई |

शिक्षा- बार-बार झूंठ बोलने वाले की सही बात भी लोगों को झूंठी ही लगती है इसीलिये झूंठ नहीं बोलना चाहिये |


इस वेबपेज के माध्यम  से  हमने बच्चों के लिये कुछ सिखाप्रद हिंदी कहानियां (moral story in hindi ) पहुंचाने का प्रयत्न किया है | आगे भी हमारा यह प्रयास जारी रहेगा | 

Monday, 3 February 2020

दुष्ट शेर और चालाक खरगोश की कहानी | Sher Aur Chalak Khargosh ki Kahani | Lion And clever Rabbit hindi story

दुष्ट शेर और चालाक खरगोश की  कहानी | Sher Aur Chalak Khargosh ki Kahani | Lion And clever Rabbit hindi story

दुष्ट शेर और चालाक खरगोश की  कहानी |  Sher Aur Chalak Khargosh ki Kahani | Lion And clever Rabbit hindi story-

एक विशाल जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था | वह शक्तिशाली होने के सांथ हे बहुत दुष्ट और घमंडी भी था | शेर का नाम  भासुरक था | जंगल के जानवर उसे देख कर थर-थर काम्पते थे| वह जिधर भी जाता उधर बहुत से जानवरों को मार डालता और उनमें से कुछ को खाता और कुछ को फेंक देता था | शेर से दुखी होकर जंगल के जानवरों ने एक सभा बुलाई | इस सभा में जंगल के सारे जानवर सम्मिलित हुए | सभा में अत्याचारी शेर से मुक्ति पाने के संबंध में चर्चा हुई | सभा में तय किया गया कि सभी जानवर शेर के पास जायेंगें और उससे विनती करेंगें की वह किसी भी जानवर को ना मारे , बदले में जंगल के जानवरों में से बारी-बारी से एक जानवर शेर का भोजन बनने के लिये भेज दिया जायेगा |
जंगल के सारे जानवर एकत्र होकर शेर के पास गए और अपना प्रस्ताव रखा | शेर भी जानवरों की बात मान गया | परन्तु उसने जानवरों को धमकी दी कि जिस दिन कोई जानवर शेर के पास  नहीं आयेगा  उस दिन से वह और अधिक जानवरों का शिकार करने लगेगा | उस दिन से जंगल के जानवरों का डर खत्म हो गया अब वे निश्चिंत होकर जंगल में घूमते थे और शेर को भी बैठे-बैठे भोजन मिलता था | बहुत दिनों तक नियमानुसार एक-एक जानवर शेर के पास जाता रहा |
एक दिन एक खरगोश की बारी आई |खरगोश शेर के पास जा तो रहा था परन्तु डर के कारण उससे चलते नहीं बन रहा था | वह जंगल में धीरे-धीरे जा रहा था उसे एक कुआं मिला वह कुछ  देर के लिये कुयें के पास बैठ गया | उसने जब कुएँ में झाँका तो कुएँ  में उसे अपनी परछाई दिखलाई दी| उस परछाई को देख कर खरगोश के मन मैं कई तरह के विचार आने लगे | वह कुछ सोचता  विचार करता हुआ  धीरे धीरे शेर की गुफा के पास पहुँच गया | शेर तब तक भूख से व्याकुल हो चुका था और अब वह जंगल में जानवरों को मारने के लिये निकलने ही वाला था  तभी  खरगोश शेर के पास पहुँच कर उसके सामने प्रणाम करता है |
खरगोश को देख का शेर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया | वह दहाड़ते हुए खरगोश से बोला-'' मैं भूख से व्याकुल हुआ जा रहा हूँ और जंगल के जानवरों ने तुझ जैसे पिद्दी को मेरा भोजन बनाकर भेजा है | अब मै जंगल के सारे जानवरों को मार दूंगा |''
शेर की बातें सुनकर , खरगोश  ने विनम्रता पूर्वक कहा-''महाराज आप क्रोध ना करें | मेरी देरी का कारण ना को मैं हूँ ,नाही जंगल के ददूसरे जानवर हैं | अगर आप मुझे माफ़ करें तो मैं आपको पूरी बात बतलाना चाहता हूँ |''
शेर ने कहा -'' अरे खरगोश तुझे जो कहना है जल्दी बोला मैं बहुत भूखा हूँ |''
खरगोश ने विन्रमता से सिर झुकाया और कहने लगा -'' महाराज मै बहुत छोटा हूँ इसीलिये जंगल के जानवरों ने मेरे जैसे पांच  खरगोश आपकी सेवा में भेजे थे | जब हम जंगल से आ रहे थे तब एक दूसरा शेर आया और हमारे यहाँ आने का कारण पूछने लगा| जब हमने आपके पास आने के बात कही तब उसने आपको बहुत  भला बुरा और डरपोक कहा और खुद को जंगल का राजा बतलाने लगा | उसने आपको युद्ध की चुनोती भी दी है |पांच में से चार खरगोश वह खा गया और मुझे जिन्दा छोड़ दिया और आपके पास भेज दिया ताकि मैं आपको उसके बारे में जानकारी दे सकूँ और उसके पास ले जा सकूँ |महाराज यही कारण है ककि  मुझे यहाँ आने में देर हो गई |''
खरगोश की बात सुनकर भासुरक शेर बोला-'' खरगोश तुम मुझे  जल्दी ही उस शेर के पास ले चलो| मैं जल्द से जल्द उस दुष्ट को सबक सिखलाना चाहता हूँ | उसने मुझे ललकारा है ,उसकी इतनी हिम्मत की वह मेरे राज्य में आकार मुझे ही युद्ध की चुनोती दे |''
भासुरक शेर की बात सुनकर खरगोश बोला-'' महाराज , युद्ध करना तो आप जैसे परमवीरों का काम है | परन्तु दुश्मन अपने दुर्ग मैं छुपा हुआ है और दुर्ग में छुपा शत्रु बहुत खतरनाक होता है |''
शेर ने कहा-'' तुम सही कह रहे हो परन्तु मुझे अपनी शक्ति पर पूरा भरोसा है | मैं उस दुष्ट को चुटकी में मसल दूंगा |''
शेर की बात सुनकर खरगोश उसे कुएँ के पास ले गया और बोला-'' महाराज , यही माँद  है जिसमें दूसरा शेर छुपा है और इसी जगह से वह आपको युद्ध के चुनोती दे रहा था |''
खरगोश भासुरक शेर को कुएँ की मेड पर ले गया | शेर ने कुएँ में झांककर देखा तो उसे अपनी ही परछाई दिखलाई दी उसे लगा की यह वही दूसरा शेर है जो मुझे चुनौती दे रहा है| भासुरक शेर ने जोर से दहाड़ मारी | उसकी दहाड़ की गूंज कुएँ से उतनी ही तेजी से वापस शेर को सुनाई दी | उस गूंज को अपने शत्रू की आवाज समझ कर भासुरक शेर ने गुस्से में उसी पल कुएँ में छलांग लगा दी और पानी में डूबकर अपने प्राण त्याग दिये |  खरगोश ने अपनी बुद्धि के बल पर शक्तिशाली शेर का खात्मा कर दिया |
खरगोश  वहां से लोटकर जंगल गया और सभी जानवरों को शेर के खात्मे का समाचार सुनाया | शेर की मृत्यु का समाचार सुनकर जंगल के सभी जानवरों में ख़ुशी की लहर दोड़ गई और सभी ने खरगोश के बुद्धिमानी के तारीफ की और अब सभी जंगल में शांतिपूर्वक रहने लगे |
शिक्षा- बलवान वही है जिसके पास बुद्धि है |

Thursday, 30 January 2020

गधा और बकरे की हिंदी कहानी | Donkey and Goat hindi story

गधा और बकरे की हिंदी  कहानी  | Donkey and Goat hindi story


गधा और बकरे की हिंदी  कहानी  | Donkey and Goat |Short story for kids in hindi

एक छोटा व्यापारी था उसने एक बकरा और एक गधा पाल रखा था | वह जब भी बाजार सामान बेचने जाता था तब अपना सामान गधे पर लाद कर ले जाता था चूंकि गधा  उसके व्यापार का में उसके बड़े काम आता था इसीलिये वह गधे को अच्छा-अच्छा भोजन करवाता था और उस पर विशेष ध्यान देता था  | फलस्वरूप गधा अच्छा-अच्छा खाना खा कर  हट्टा -कट्टा हो गया | यह सब देखकर बकरे को गधे से ईर्ष्या होने लगी | बकरा सोचने लगा की गधे को  मालिक की नजरों से कैसे नीचा  दिखलाया जाये | एक दिन गधा और बकरा अकेले थे |
 बकरा गधे के पास जाकर बोला-'' गधा भाई , मालिक का तुम्हारे सांथ व्यवहार बहुत बुरा है , दिन भर तुम्हारे ऊपर सामान रखकर घसीटता रहता है , तुम्हे फुर्सत से एक पल भी नहीं रहने देता, गुलाम बना कर रखा है और मुझे देखो मैं आजाद हूँ जिधर जाना चाहता हूँ जाता हूँ   , मालिक को तुम्हारे सांथ इतना गन्दा व्यवहार नहीं करना चाहिये |''
बकरे के बातें गधे के मन मैं बैठ गईं | गधा बोला-'' भाई , तुम सही बोल रहे हो , यह बात तो मुझे भी बहुत बुरी लगती  है , लेकिन मैं इसमें कुछ कर भी नहीं सकता |''
गधे की बात सुनकर बकरा मन ही मन बहुत खुश हुआ और गधे को  किसी गड्ढे में गिरने और चोट का बहाना बनाकर कुछ दिन आराम करने की सलाह दी |  गधे ने बकरे की बात मानी और जानबूझ कर गड्ढे में गिर गया परन्तु गड्ढे में गिरने से गधे को ज्यादा चोट लग गई और अब उससे चलते भी नहीं बन रहा था |
अब व्यापारी का काम प्रभावित होने लगा उसके पास  नया गधा खरीदने के लिये  पैसे भी नहीं थे | अब उसने गधे  का काम बकरे से लेना शुरू कर दिया |वह प्रतिदिन बकरे पर माल लाद कर बाजार ले जाता और शाम को ही  लौट  कर आता | अब बकरे को समझ आ गया की गलत राय किसी को नहीं देना चाहिये नहीं तो कई बार राय  देने वाले को ही नुकसान उठाना पड़ता है |
शिक्षा- कभी किसी को गलत सलाह नहीं देना चाहिये दूसरे का बुरा सोचने वाले का कभी भला नहीं हो सकता |

Monday, 27 January 2020

बन्दर और मगरमच्छ की कहानी-पंचतन्त्र हिंदी कहानी | Bandar aur Magarmachh ki kahani-panchtarnra hindi kahani -

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Monkey and Crocodile

बन्दर और मगरमच्छ की कहानी-पंचतन्त्र हिंदी कहानी  | Bandar aur Magarmachh ki kahani-panchtarnra hindi kahani -

एक बन्दर था | वह एक नदी के किनारे जामुन के पेड़ पर रहता था | उसी नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था |
धीरे-धीरे बन्दर और मगरमच्छ में दोस्ती हो गई | जब जामुन के पेड़ में फल आये तो बन्दर तो  जामुन के मीठे-मीठे  और रसीले फल खाता था सांथ  ही  नीचे भी गिराता था जिन्हें उसका मित्र मगरमच्छ भी खाता था | दोनों दिन भर बातें करते और मीठे मीठे फल खाते थे और दोनों को दोस्ती मजे से कट रही थी |
मगर ने सोचा की मैं अकेला ही स्वादिष्ठ फल खता हूँ  उस दिन मगरमच्छ कुछ फल अपनी बीबी के लिये  ले गया | उसकी बीबी ने भी फल खाये  उसे भी फल बहुत अच्छे लगे | इस तरह वह रोज अपनी बीबी को जामुन के फल ले जाने लगा | 
एक दिन मगरमच्छ की बीबी ने पूछा -''तुम इसने मीठे रसीले जामुन के फल किधर से लाते हो ?''
मगरमच्छ बोला-''मेरा एक दोस्तहै बन्दर | वह जामुन के पेड़ पर रहता है और वह भी फल खता है और मुझे भी फल खिलाता है |
मगरमच्छ की बीबी ने सोचा जो बन्दर रोज इतने मीठे फल खता है ,उसका कलेजा कितना मीठा होगा | फिर एक दिन वह मगरमच्छ से बोली -''तुम्हारा मित्र बन्दर रोज मीठे फल खता है , उसका कलेजा  तो बहुत  मीठा होगा , आज मुझे  बन्दर का कलेजा खानाहै ''|
मगरमच्छ   बोला- '' बन्दर मेरा मित्र है मैं उसका कलेजा नहीं ला सकता "||
मगरमच्छ की बीबी मगरमच्छ पर बहुत ज्यादा नाराज हुई और बोली -''जब तक तुम बन्दर का कलेजा नहीं लोगे मैं खाना-पीना नहीं कहूंगी और तुमसे बात भी नहीं करुँगी ''| बेचारा मगरमच्छ अपनी बीबी की जिद के आगे झुक गया और बन्दर का कलेजा लाने के लिये तैयार हो गया |
दूसरे दिन मगरमच्छ , बंदर के पास गया और बोला - ''मित्र आज तुम्हारी भाभी ने घर में बहुत ही स्वादिष्ट पकवान बनाये है और तुम्हे खाने पर बुलाया है ''|
स्वादिष्ट पकवानों का नाम सुनकर बन्दर के  मुंह  में पानी आ गया और वह मगरमच्छ के सांथ जाने के लिये तैयार  हो गया | लेकिन बन्दर को  तैरना नहीं आता था |
 बन्दर , मगरमच्छ से बोला  -''मित्र मुझे तैरना नहीं आता |
मगरमच्छ ने कहा-'' मित्र बन्दर , कोई बात नहीं तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ , मैं तुम्हे अपने सांथ लिये चलता हूँ ''|
बन्दर ,मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया और पानी में सबारी  करने का मजा ले रहा था | दोनों बात करते करते नदी के बीच में पहुँच गये | बातों ही बातों में मगरमच्छ ने बन्दर को बतला दिया कि  मगरमच्छ की  पत्नी बन्दर का कलेजा खाना चाहती है इसीलिये वह बन्दर को अपने घर ले जा रहा है |
यह बात सुन्दर बन्दर को झटका लगा और बहुत  दुःख हुआ कि जिस मगरमच्छ को वह मीठे मीठे जामुन  के फल खिलाता था वही मगरमच्छ उसका कलेजा अपनी बीबी को खिलाना चाहता  है | बंदर पहले तो बहुत डर गया फिर उसने अपने आप को संभाला |
बन्दर  बोला -''मित्र , तुमने मुझे पहले क्यूँ नहीं बतलाया , मैं तो अपने कलेजा उसी जामुन के पेड़ पर भूल आया हूँ | अगर भाभी  को कलेजा चाहिए  तो पहले हमें उस पेड़ पर चलना होगा फिर मैं  कलेजा लेकर वापस तुम्हरे सांथ चलूँगा |''
मगरमच्छ बेबकूफ था , बन्दर की बातों में आ  कर वापस जामुन के पेड़ के पास पहुँच गया | बन्दर तुरंत  ही छलांगें मरकर बापस जामुन के पेड़ पर चढ़ गया और विश्वासघाती  मगरमच्छ से बोला - ''अरे बेबकूफ मगरमच्छ ,अपना कलेजा क्या कोई बाहर रखता है , तूने मेरे सांथ विश्वासघात  किया है , आज से तेरी और मेरी दोस्ती खत्म ,आज के बाद में तुझे कभी फल भी नहीं खिलाऊंगा ''|
बन्दर की बात सुनकर मगरमच्छ बेइज्जत होकर अपने घर लोट आया | अब उसे मीठे फल मिलना भी बंद हो गए |
शिक्षा - इस कहानी से हमें सिखा मिलती है की कभी भी  विश्वासघातियों और दुष्टों की दोस्ती नहीं करनी चाहिये और संकट के समय अपना धेर्य नहीं खोना चाहिये |